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छात्रा कैडेट्स को भी सेना की एडवेंचर विंग करेगी ट्रेंड, ड्रोन डिफ्यूज करना भी सिखाएंगे

छात्रा कैडेट्स को भी सेना की एडवेंचर विंग करेगी ट्रेंड, ड्रोन डिफ्यूज करना भी सिखाएंगे

अजमेर: राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल अजमेर में अध्ययनरत छात्रा कैडेट्स को भारतीय सेना की एडवेंचर विंग विशेष प्रशिक्षण देगी। इससे कैडेट्स शारीरिक रूप से मजबूत बनेंगी। वे सेना में अफसर बनने के लिए काबिलियत हासिल कर सकेंगी।

प्रिंसिपल लेफ्टिनेंट कर्नल रितु छेत्री ने यह प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा है, मंजूरी मिलते ही इस दिशा में काम शुरू हो जाएगा। इसका उद्देश्य सेना में महिला अफसरों की भागीदारी को बढ़ाना है।

छात्रा कैडेट्स को भी सेना की एडवेंचर विंग करेगी ट्रेंड, ड्रोन डिफ्यूज करना भी सिखाएंगे

लेफ्टिनेंट कर्नल रितु देश के राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूलों में पहली महिला प्रिंसिपल हैं, जो राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल अजमेर में पदस्थ हैं। उन्होंने चुनौतियों का सामना करने और सेना की मांगों के अनुरूप कैडेट्स को तैयार करने के लिए कई नवाचार किए हैं। मिलिट्री स्कूल में देशभर के विभिन्न राज्यों से 38 गर्ल्स कैडेट्स अध्ययनरत हैं, जबकि कुल कैडेट्स की संख्या लगभग 380 है।

प्रशिक्षण, रेलवे पैरा ग्लाइडिंग, पैरा सेलिंग, रोवर राफ्टिंग में दक्ष बनेंगे कैडेट्स

एडवेंचर विंग के प्रशिक्षण के तहत कैडेट्स को पैरा ग्लाइडिंग, पैरा सेलिंग, रोवर राफ्टिंग, माउंटेनियरिंग, मंकी क्रॉल, फॉक्स फ्लाइंग और पैरा जंपिंग जैसे रोमांचक एडवेंचर एक्टिविटीज में पारंगत बनाया जाएगा। ये गतिविधियां न केवल उनके साहस, धैर्य और टीमवर्क को बढ़ाएंगी, बल्कि शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और जोखिम प्रबंधन की क्षमता भी विकसित करेंगी।

सेना की एडवेंचर विंग विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के माध्यम से यह ट्रेनिंग प्रदान करेगी, जो कैडेट्स को वास्तविक युद्धक्षेत्र जैसी स्थितियों के लिए तैयार करेगी। स्कूल में कैडेट्स के लिए पहले से ही खास प्रशिक्षण चल रहे हैं। उन्हें हॉर्स राइडिंग और निशानेबाजी में विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है। रोबोटिक्स लैब में एक्सपर्ट््स द्वारा ट्रेनिंग दी जाती है, जहां वे आधुनिक तकनीक से जुड़ती हैं।

नए सत्र में एक खास पहल, ड्रोन क्लब बनेगा

नए सत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम ड्रोन क्लब की स्थापना है। उपाचार्य डॉ. अतुल वर्मा ने बताया कि नए सत्र में यह क्लब शुरू हो जाएगा। यहां कैडेट्स को ड्रोन असेंबल करने, उड़ाने, लैंड कराने के साथ-साथ दुश्मन के ड्रोन की पहचान करने और उसे ध्वस्त करने की तकनीक सिखाई जाएगी।

यह प्रशिक्षण आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए बेहद उपयोगी साबित होगा। ये सभी प्रयास कैडेट्स को सेना में अफसर बनने के लिए व्यापक रूप से तैयार करने के हैं। भारतीय सेना में पहले महिलाओं को सीमित क्षेत्रों में ही मौका मिलता था, अब वे कॉम्बेट रोल्स में भी शामिल हो रही हैं। राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल जैसे संस्थान इस बदलाव की नींव रख रहे हैं। यहां की ट्रेनिंग से कैडेट्स एनडीए, आईएमए और अन्य सैन्य अकादमियों में प्रवेश पाने के लिए मजबूत बनेंगी। एडवेंचर एक्टिविटीज से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, अनुशासन मजबूत होगा और नेतृत्व क्षमता विकसित होगी।

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